इस
फिल्म मे जो भी बयान और विचार थे वो व्यक्ति गत थे
सोनिया देओल के. वो भी हादसे के
२५ साल बाद जब कि
वो तो इस हादसे से किसी भी तरह से जुडी भी नहीं थी.
इस फिल्म को बनाने वाली सोनिया
देओल ने खुद इस फिल्म
मे कहा है कि वो अभी अभी अपने भाग्य और धर्म को
समझने लगी
है. स्वर्ण मंदिर के दर्शन के बाद मे.
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